पत्नी, बेटे-बेटी को बेहोश कर तेल छिड़ककर आग लगाई, बाद में खुद भी आत्मदाह कर लिया, चारों जिंदगियां राख

 
  • सीकर के युवक ने पंजाब के फरीदकोट में दिल दहलाने वाली घटना को अंजाम दिया
  • सीकर के डूकिया का रहने वाला था परिवार, सुसाइड नोट में बठिंडा के एक व्यक्ति पर आरोप
  • सुबह करीब छह बजे गांव के कुछ लोगों ने धर्मपाल के घर से धुआं उठता देखा दरवाजा बंद था

पंजाब के फरीदकोट के कलेर गांव में सीकर के डूकिया गांव निवासी व्यक्ति ने पहले अपनी पत्नी, बेटी व बेटे को जलाया, उसके बाद खुद भी आत्मदाह कर लिया। पुलिस ने घर के कमरे से चार के जले हुए शव बरामद किए हैं। मृतकों की शिनाख्त सीकर के हुकिमा गांव निवासी कलेर के ईंट-भट्ठे पर मुंशी का काम करने वाले 38 वर्षीय धर्मपाल, उसकी पत्नी 36 वर्षीय सीमा देवी, बेटी 15 वर्षीय मीना व 12 वर्षीय बेटा हरतेश के रुप में हुई।

मरने से पहले धर्मपाल ने भट्ठे पर काम करने वाले रिश्तेदार सुरेश कुमार को सोशल मीडिया पर संदेश भेजा था। पुलिस अधिकारियों ने आशंका जताई कि पहले धर्मपाल ने अपनी पत्नी व बच्चों को कुछ खिलाकर बेहोश किया, बाद में उन पर तेल छिड़ककर आग लगा दी। तत्पश्चात, खुद पर भी तेल छिड़ककर आग लगा ली। सुसाइड नोट में धर्मपाल ने इस घटना के लिए बठिंडा के एक व्यवसायी को जिम्मेदार ठहराया।

कलेर गांव की सरपंच कुलदीप कौर के अनुसार, सुबह करीब छह बजे गांव के कुछ लोगों ने धर्मपाल के घर से धुआं उठता देखा। दरवाजा बंद था। इसी दौरान धर्मपाल का रिश्तेदार वहां आया। उसने बताया कि सुबह करीब सवा चार बजे धर्मपाल ने उसे आत्महत्या करने का संदेश भेजा था। इसके बाद दीवार फांदकर कुछ युवक घर के अंदर कूदे और दरवाजा खोला। कमरे में दाखिल होने पर सबके होश उड़ गए। बेड पर हरतेश व मीना के झुलसे हुए शव पड़े थे। जमीन पर गिरी हुई मीना के जले हुए शव के हाथ में बेड की चादर थी।

बेड के पास बिछी चारपाई पर धर्मपाल का जला हुआ शव था।पास ही एक बाल्टी में करीब आधा डीजल बाल्टी में रखा था। रसोई गैस सिलेंडर की पाइप खुली हुई थी। लोगों ने ऐसा मंजर देख पुलिस को सूचित किया। एसएसपी स्वर्णदीप सिंह, एसपी सेवा सिंह मल्ली, डीएसपी सतिंदर सिंह विर्क व अन्य पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच-पड़ताल शुरू की।

पुलिस को घर के बाहर पड़ी ईंटों के ढेर पर सभी सदस्यों के आधार कार्ड, मोबाइल फोन, बच्चे के पेपर बोर्ड पर लगा दो पन्नों का सुसाइड नोट और एक अन्य पन्ना मिला, जिस पर पैसों के लेन-देन का हिसाब लिखा था।

बेड के पास बिछी चारपाई पर धर्मपाल का जला हुआ शव था।पास ही एक बाल्टी में करीब आधा डीजल बाल्टी में रखा था

बेड के पास बिछी चारपाई पर धर्मपाल का जला हुआ शव था।पास ही एक बाल्टी में करीब आधा डीजल बाल्टी में रखा था

ईंट-भट्‌टे के मालिक का विश्वासपात्र था धर्मपाल
ईंट-भट्ठे पर काम करने वाले जगदीप सिंह के अनुसार धर्मपाल 10 सालों से वहां काम कर रहा था। मालिक का विश्वासपात्र था। एसएसपी स्वर्णदीप सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही तय हो पाएगा कि असल घटनाक्रम क्या था।
लॉकडाउन में आखिरी बार राजस्थान अपने गांव आया
लाॅकडाउन के दाैरान धर्मपाल अपने गांव आया था। कलेर गांव की सरपंच के प्रयासाें से उसकी वापसी हाे सकी थी। सरपंच ने बताया कि गांव में किसी ने उसेे या उसके परिवार को लड़ता-झगड़ता तो दूर, कभी ऊंची आवाज में बात करते भी नहीं सुना।
आत्मदाह से पहले सभी लोगों का उधार चुकाया
दुकानदार बब्बू के अनुसार, शुक्रवार को धर्मपाल ने उसे हिसाब बनाकर देने को कहा, लेकिन वह व्यस्त था। घटना के बाद उसे पता चला कि धर्मपाल सभी लोगों के पास गया, जिनसे उसका कुछ लेना-देना था। लेन-देन का जिक्र सुसाइड नाेट में भी है।

सुसाइड नोट : लॉकडाउन के कारण मानसिकता टूट गई, हमारे देह हमारे गांव पहुंचा देना
मैं धर्मपाल खुद लिख रहा हूं पूरे होशोहवास में। इस घटना का मैं खुद जिम्मेवार हूं। माता-पिता का बुढ़ापे का सहारा नहीं बना। इसके लिए मैं माफी चाहता मांगता हूं। सास-ससुर से भी माफी मांगता हूं कि मैं आपकी बच्ची का ख्याल नहीं रख सका। मैंने जानबूझ कर किसी का बुरा नहीं किया। पता नहीं परमात्मा कौन सी गलती की सजा दे गया। मेरे इस फैसले का कारण शन्टी मित्तल बठिंडे वाला 9815480518 रहा है। शन्टी मित्तल का मुझे धोखा देना वैसे बड़ी बात नहीं थी, लेकिन लॉकडाउन के कारण मेरी मानसिकता टूट गई कि उस धोखे से संभल ही नहीं पाया।

इन पांच महीनों में मैं बड़ा परेशान हुआ। रोज मर-मर के जिया हूं। इस कारण मुझे यह फैसला लेना पड़ा। मैं मेरे मालिक से विनती करता हूं कि मेरे जाने के बाद मेरी जगह सागर बाबू को दे, वह यह जिम्मेवारी संभाल लेगा। सरकार से विनती है कि शन्टी बाबू से मेरे परिवार की आर्थिक मदद करवा दे, बड़ा धन्यवाद होगा, बाकी हमारी देह को हमारे जन्मस्थान सीकर जिले में डूकिया गांव भिजवा दे। मैं बड़े दिनों से कोशिश कर रहा था, लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। आज पता नहीं कहां से इतनी हिम्मत आ गई। पल-पल मर रहा हूं। उससे अच्छा ही है हर बार की जगह एक ही बार मरना।
बच्चों को इंग्लिश मीडियम में पढ़ाया
गांववासियों के अनुसार, बेशक धर्मपाल ज्यादा पढ़-लिखा नहीं था, लेकिन दोनों बच्चों का दाखिला गांव से करीब 4-5 किलोमीटर दूर एक प्रतिष्ठ इंग्लिश मीडियम स्कूल में कराया था।

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