राखियों में पिरो रहीं प्यार, ताकि न टूटे रिश्तों की डोर; आत्मनिर्भर बनने के लिए हर साल लड़कियां बनाती है राखी।

 

निर्भया शेल्टर होम में लड़कियों व महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए इस साल भी राखी बनाने का काम सौंपा गया है। इन राखियों को भोपाल हाट में लगने वाले सावन मेले में बेचा जाता था, लेकिन इस बार कोरोना व लॉकडाउन के चलते यह राखियां अधिकारी और जज खरीदेंगे। इनमें जिला विधिक प्राधिकरण के सचिव संदीप शर्मा, बाल कल्याण समिति सदस्य, महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस सहित अन्य विभाग के अधिकारी राखियां लेंगे।

निर्भया शेल्टर होम की संचालक समर खान का कहना है कि सामान्यजन भी राखियां खरीद सकते हैं। इसके लिए निर्भया शेल्टर होम के मोबाइल नंबर 6261121962 पर संपर्क कर सकते हैं। 12 लड़कियों व महिलाओं ने इस बार 1 हजार राखियां बनाई हैं।

परवाह...अब बच्चे का बनाएंगे भविष्य
निर्भया शेल्टर होम में रह रही ज्यादती की शिकार युवती राखियों में अपना प्यार उड़ेल रही है। कई डिजाइन खुद ने बनाई हैं। युवती का कहना है कि अब उसके साथ एक बच्चा है। मेरे साथ जो घटना हुई उसे लेकर कब तक बैठेंगे। मैंने जो राखियां बनाई हैं, उन्हें बेचकर जो रुपए मिलेंगे। वह बच्चे के भविष्य के लिए जोड़ेंगे। अब मैं आत्मनिर्भर बनना चाहती हूं।

खुशी... राखियां बनाना अच्छा लगता है
इस युवती की कहानी भी दर्द भरी है। पोलियो होने के कारण परिवार ने सड़क पर छोड़ दिया था। रेलवे स्टेशन पर पुलिस ने घूमते देखा तो बालिका गृह पहुंचा दिया। यहां पली-बढ़ी। व्यस्क होने के बाद निर्भया शेल्टर होम आ गई। युवती ने कहा कि अब यहां के लोग ही मेरा परिवार हैं। मुझे राखियां बनाना बहुत अच्छा लगता है। मेरी बनाई राखी जब कोई बहन अपने भाई को बांधती है तो खुशी मिलती है।

प्रार्थना...ये राखियां बढ़ाएंगी रिश्तों में मिठास
मेरा भरा पूरा परिवार था। 4 भाई थे। माता-पिता के मरने के बाद चारों भाईयों ने पल्ला झाड़ लिया। एक दिन पुलिस ने शेल्टर होम पहुंचा दिया। जब भी राखी का त्योहार आता है तो राखियां बनाते हुए हमेशा सोचती हूं कि मेरे द्वारा बनाई गई राखियां भाई-बहन के बीच प्यार बढ़ाए। मेरे भाईयों ने मेरे साथ जैसा किया वैसा किसी बहन के साथ न हो।

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