विश्व स्तनपान दिवस:मां का दूध अमृत... 5 कोरोना पॉजिटिव नवजात ठीक हुए

 

कोरोनाकाल में पीजीआईएमएस के गायनी वार्ड में डिलीवरी को कराने वाली 16 गर्भवती महिलाओं कोरोना पॉजिटिव पाया जा चुका है। पीजीआई के अलावा दूसरे जिलों और शहरों के अस्पतालों से आए पांच नवजात कोरोना पॉजिटिव मिले, जबकि मां की रिपोर्ट निगेटिव आई है।

डिलीवरी के बाद मां को संक्रमित पाए जाने पर नवजात को भी एहतियात के तौर पर न्यूनोटाेलॉजी विभाग में बनाए गए निक्कू कोविड 19 वार्ड में रखा है। आईसोलेशन वार्ड में भर्ती मां से ब्रेस्ट मिल्क लेकर काेविड निक्कू वार्ड में भर्ती नवजात को पिलाया गया। एक सप्ताह से अधिक समय तक भर्ती रहने तक चिकित्सकों और स्टाफ नर्स की निगरानी में नवजात को ब्रेस्ट मिल्क फीडिंग कराई गई। कोरोना संक्रमित मां का दूध पीने वाले नवजात शिशुओं पर कोरोना संक्रमण का अटैक बेअसर रहा।

न्यूनोटोलॉजी विभाग के चिकित्सक बताते हैं कि सेंट्रल फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन की रिपोर्ट में लिखा है कि अभी तक कोरोना वायरस से पीड़ित जिन महिलाओं ने शिशु को जन्म दिया है, उन बच्चों को कोरोना वायरस से संक्रमित नहीं पाया गया है। अभी तक पीजीआई में 21 केस का अध्ययन करने पर पाया गया है कि मां के दूध में कोरोना वायरस ट्रांसफर नहीं हो पाया।

...तो इसलिए है मां का दूध सर्वोत्तम आहार: न्यूनोटोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. जगजीत दलाल बताते हैं कि मां के दूध में सभी तरह के जरूरी पोषक तत्व जैसे एंटी बाॅडीज, हार्मोन, प्रतिरोधक कारक और ऐसे आक्सीडेंट पूर्ण रूप से मौजूद होते हैं, जो नवजात शिशु के बेहतर विकास और स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। मां के प्रथम दूध (कोलोस्‍ट्रम) में गाढ़ा, पीला दूध आता है, जिसे शिशु जन्‍म से लेकर कुछ दिनों तक सेवन करता है। इस प्रथम गाढ़े दूध में विटामिन, एंटीबॉडी, अन्‍य पोषक तत्‍व काफी अधिक मात्रा में होते हैं, जिससे बच्चों में रतौंधी जैसे अन्य संक्रामक रोगों के होने का खतरा भी टल जाता है।

मां के दूध ने शिशुओं में राेग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई है। इसकी वजह से शिशुओं में कोरोना संक्रमण नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि चार माह के कोरोनाकाल में न्यूनोटोलॉजी विभाग में आने वाले संक्रमित और गैर संक्रमित नवजात शिशुओं को बेहतर चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हेल्थ यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. ओपी कालरा और पीजीआईएमएस के डायरेक्टर डॉ. रोहतास यादव लगातार प्रयासरत हैं। -डॉ. जगजीत दलाल, एचओडी, न्यूनोटोलॉजी विभाग, पीजीआईएमएस

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