क्या निराशावादी लोगों में मौत का खतरा ज्यादा होता है? ऑस्ट्रेलियाई रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा

 

विशेषज्ञों की तरफ से निराशावादी लोगों को चेतावनी जारी की गई है. शोध के मुताबिक निराशावादी लोगों की मौत आशावादी लोगों की तुलना में जल्दी हो जाती है. शोधकर्ताओं ने पाया कि औसत लोगों की तुलना में वर्तमान या भविष्य के बारे में नकारात्मक रुजहान रखनेवालों की दो साल पहले मौत हो गई.

क्या निराशावादी जल्दी मर जाते हैं?

ऑस्ट्रिलाई शोधकर्ताओं ने 3 हजार से ज्यादा लोगों पर शोध किया. जिसके बाद उन्होंने बताया कि निराशावादी लोगों की मौत जल्दी हो जाती है. रिपोर्ट के मुताबिक QIMR Berghofer मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट ब्रिस्बेन के शोध में पता चला कि जो लोग हमेशा मायूसी की बातें करते और शिकायत करते हैं उन्हें दिल की बीमारियों समेत कई अन्य बीमारी हो जाती है. दूसरी तरफ खुशहाल जिंदगी जीनेवालों पर उसका कोई असर नहीं पड़ता. उनकी उम्र ज्यादा नहीं होती बल्कि औसत सोच वाले लोगों के बराबर ही होती है.

ऑस्ट्रेलियाई शोधकर्ताओं ने किया दावा

शोधकर्ताओं का कहना है सकारात्मक सोच रखने वाले लोगों से दो साल जल्द पहले ही नकारात्मक सोच रखनेवाले मौत के मुंह में चले जाते हैं. इससे पहले के शोध में आशावाद और निराशावाद के बीच संबंध और कुछ खास बीमारी का खुलासा हो चुका है. QIMR Berghofer ने बयान में कहा गया, “आशावाद और निराशावाद दोनों एक दूसरे के विपरीत नहीं हैं. बल्कि हमारे नतीजे का मुख्य बिंदु यही है कि दो अलग स्केल को इस्तेमाल कर आशावाद, निराशावाद और उसके मौत के सभी कारणों से संबंध का पता लगाया गया. शोध में शामिल लोगों को सकारात्मक बातों समेत कई पहलू से सहमत होने या असहमत होने का विकल्प दिया गया था.

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