नवरात्रि व्रत में इन 6 नियमों का करें पालन, देवी माता सुख संपदा से भर देंगी घर.

 

इस समय शारदीय नवरात्रि का पर्व चल रहा है. नवरात्रि 9 दिनों का होता है. इस बार शारदीय नवरात्रि 17 अक्टूबर से प्रारंभ होकर 25 अक्टूबर 2020 तक होगा. नवरात्रि  के पवित्र दिनों में माता रानी की उपासना की जाती है. भक्तजन इस दौरान 9 दिनों का व्रत रखकर माता रानी को प्रसन्न करने के लिए पूजा – अनुष्ठान करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक नवरात्रि के 9 दिनों में माँ के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करने और व्रत रखने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और मां भक्तजनों की सभी मनोकामनाएं पूरा करती हैं.

नवरात्रि व्रत में इन 6 नियमों का करें पालन

  1. धार्मिक कार्यों में मन लगाएं: नवरात्रि के 9 दिनों में व्रतधारी को अपना मन भौतिकता की चीजों से दूर रखना चाहिए. उन्हें अपना मन हमेशा माता रानी के चरणों में लगाकर रखना चाहिए. धार्मिक कार्यों में समय बिताना चाहिए. इस दौरान दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तसती का पाठ करते रहना चाहिए.
  2. कन्याओं / महिलाओं का सम्मान करना चाहिए: भारतीय परंपरा में कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है. इसी कारण से लोग नवरात्रि में कन्या का पूजन या कंजका का पूजन कर पुण्य प्राप्त करते हैं. नवरात्रि के दिन में सभी महिलाओं में किसी न किसी देवी का स्वरूप होता है. इसीलिए किसी भी कन्या/ महिला के प्रति असम्मान का भाव नहीं रखना चाहिए बल्कि उनमें मां दुर्गा के किसी न किसी स्वरूप को मानकर मन ही मन  प्रणाम करना चाहिए.
  3. घर को न छोड़े अकेला : यदि घर में कलश {घट} की स्थापना हुई हो या माता की चौकी या ज्योति लगी हो तो किसी न किसी को हमेशा उसके पास रहना चाहिए. इस दौरान घर में किसी एक व्यक्ति का होना जरूरी होता है. व्रतधारी को दिन में नहीं सोना चाहिए.
  4. तामसिक भोजन से करें परहेज: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के दौरान व्यक्ति को सात्विकता का विशेष ध्यान रखना चाहिए. उन्हें तामसिक प्रवृति के भोजन से परहेज रखना चाहिए. नवरात्रि के 9 दिनों में आहार, व्यवहार और विचार में सात्विकता होनी चाहिए.
  5. कामवासना पर रखें नियंत्रण: नवरात्रि के दिनों में कामवासना से मनसा वाचा कर्मणा विरक्त रहना चाहिए. महिला और पुरुष दोनों को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए.
  6. क्रोध से रहें दूर: नवरात्रि के दौरान व्यक्ति को क्रोध नहीं करना चाहिए. उन्हें अधिक से अधिक समय तक मौन व्रत धारण करना चाहिए.

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